दिल के अंतस से उपजी एक कविता..... दिल के अंतस से उपजी एक कविता.....
अब इन सबको स्मृति कह लो या आत्मा। अब इन सबको स्मृति कह लो या आत्मा।
वो आनंद है सत्य का वो साक्षात्कार है खुद का। वो आनंद है सत्य का वो साक्षात्कार है खुद का।
ईमानदार लोगों का नाम पूछा गया, ईमानदार लोगों का नाम पूछा गया,
सारा जग अब सुंदर लगता खुद से साक्षात्कार हो गया। सारा जग अब सुंदर लगता खुद से साक्षात्कार हो गया।
संग कैसे द्वय को तुष्ट करें संग कैसे द्वय को तुष्ट करें